karma| कर्म का फल जरूर मिलता है|| सच्ची बात| किसी को सताना नहीं चाहिए
कर्मा
बिना कहे ही जो सब कुछ कह जाते हैं|
क्या कसूर है उनका जो सब कुछ सह जाते हैं?
हर क्षण अंतर्मन में डूबे हुए|
भीड़ में भी अकेले रह जाते हैं||
सोचते रहते हैं ,हम हैं यहां किस हाल में|
बड़े मनमौजी थे,जब थे हम बाल्यकाल में ||
अंतर मन की व्यथा बाहर से सामाजिक व्यवहार |
जीवन की है यह जीत, या है हार||
पाया बहुत जीवन से, फिर भी सुख का अनुभव नहीं|
जैसे खुशियां चली गई हो घूमने कहीं||
सोचता हूं क्या पाया, क्या खोया|
अंतर्मन बोला……
वही काटा, जो बोया||
यह कर्मा है लौट के जरूर आता है|
जो हम जीवन में करते हैं, वही हमें मिल जाता है||
गर नहीं है खुशियां जीवन में, तो छीनी होंगी हमने भी|
व्यथित मन गर है अगर, हमने दी होगी व्यथा कहीं ||
मेरी कलम से ,
फिर यूं ही चलते चलते |
Rohit sahu 🖋📖
माध्यमिक शिक्षक
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