समय चक्र
सफलता के पहले
🌷 समय चक्र🌷
ना आशा की थी किरण कहीं |
बस घोर अंधेरा छाया था ||
श्रम भी था उसके अंदर |
पर अंदर से घबराया था ||
मौसम आया जब पतझड़ का |
अब नहीं सुहाना मौसम है||
पतझड़ ही अब मेरा जीवन है |
जब समय का पहिया चलता है |
मौसम भी रंग बदलता है ||
अंजाना था इन बातों से |
इसलिए भ्रमर था घबराया||
मौसम भी फिर रंगीन हुआ |
सोचा था कभी जिन पुष्पों को,
अब लगे डालियों में लगने |
जो गलिया थी बीरानी सी ,
सजने लगी फिर पुष्पों से |
फिर भंवरा भी रमकर उनमें,
अपनी संतुष्टि पाता है |
मौसम बदलते देर नहीं लगती,
वक्त सभी का आता है |
मेरी कलम से 🖋
बस यूं ही चलते चलते
Rohit sahu 📖
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